जिन्दा हो तो जिन्दगी है !!

जिन्दा हो तो जिन्दगी है, रफ़्तार की अब क्या कहें ?
कभी धीमी, कभी तेज तो कभी ठहर जाती है जिन्दगी | 
तनहा सफ़र,आँखें रुखी,ओंठ प्यासे, हर कदम में सूनापन 
हमसफ़र मिलता नहीं कि सुहानी हो जाती है जिन्दगी |
कोई हर वक़्त साथ रहा, और दोस्त भी न बन पाया  
किसी को एक लम्हे में अपना बना जाती है जिन्दगी |
कैसी माया है ये कि एक पल में कोई जी लेता है सदियाँ
अफ़सोस, किसी के लिए वहीँ छोटी पड़ जाती है जिन्दगी |