हर जर्रे में हमारी दास्ताँ हो !!!

मदहोशी का आलम हो, न सुबह, न शाम हो
तू सामने रहे नजर के, न भूख हो, न प्यास हो |
हर गुफ्तगू तेरी हो, पर एक चाहत मेरी हो
मैं सुन लूँ तुझे, तू आवाज हो चाहे बे-आवाज हो |
तेरे आंसू मेरे बने, मेरी हंसी तुझपे मरे
ख़ुशी तेरी मुट्ठी में हो, मेरा वक़्त तेरा गुलाम हो |
मुझे कोई अच्छा न लगे, कभी कुछ बुरा न लगे
ऐतबार हो तो तुझपर हो, रुसवाई हो तो तुझसे हो |
लहर चींखें देखकर मुझे, साहिल मुझसे तेरा नाम पूछे 
हर तरफ हमारा शोर हो, हर जर्रे में हमारी दास्ताँ हो |