अब तुम मेरे साथ चलो !!!

सुबह सूरज की पहली किरण से लेकर शाम के ढलते सूरज की आखिरी किरण तक हमारी जिन्दगी इतनी व्यस्त रहती है की हमें अपने बारे में सोचने का वक़्त ही नहीं मिलता ।ऐसे लगता है जैसे हम जिन्दगी को नहीं जिन्दगी हमें चला रही होती है ।काम ,काम और बस काम ।शाम को थक -हार कर हम घर आते है।रात आने पर हम छत  पर चले जाते है और एकदम अकेले हो जाना चाहते है ।सारी दुनिया से बेखबर ।हम चुपचाप आँख बंद कर लेट जाते है।रात की चांदनी हमें अपने आँचल में ढक लेती है ।चाँद सारी दुनिया को निहारता और अपनी प्रियवर को खोजता आगे बढता रहता है ।तभी  रात की  शीतल  हवा हमारे बदन को छूकर  किसी का एहसास दिला जाती है ।जो हमारे दिल के सबसे करीब  होता है ।और हम उसके सपनो में खोते चले जाते है।और यही से शुरू  होती है पिछली रात की अधूरी  कहानी जो कल रात अधूरी रह गयी थी ।हम उसे अपने पास महसूस करने लगते है, उससे बाते करने लगते है ,वादे  करते है और सुनहरे भविष्य के सपने देखने लगते
है।  और एक दुसरे में खोते चले जाते हैऔर इसी कसमकस में कब नींद हमें अपने आगोश में समेट लेती है  पता  ही नहीं चलता ।
ऐसे  आलम में बस यही कहने को जी चाहता  है -
रातो का सफ़र अब जारी  हुआ, कोई नहीं है हम-दम मेरा 
तुम बन के मेरी हमसफ़र ,अब तुम मेरे साथ चलो ।
तारे तुझको देख रहे है ,अभी चाँद भी तुझको छेड़ेगा 
छुप कर मेरे सीने में अब तुम मेरे साथ चलो ।
 कुछ वादे किये थे  मिलकर हमने, देखे थे कुछ सपने हमने
पूरा करने उन सपनो वादों को अब तुम मेरे साथ चलो ।
दिन के उजालो में गर हम निकले, देखेगी दुनिया चोर नजर से 
हो के निडर रात की सुन्दर आभा में, अब तुम मेरे साथ चलो ।
रहेंगे जब तक चाँद सितारे कभी ख़तम न होगा अपना सफ़र 
भूल के तुम ये दुनिया सारी अब तुम मेरे साथ चलो ।