अब लौट भी आओ जानम !!!

बसंत  की बहारें आने में बस चंद दिन ही बचे है । हरे -भरे बगीचों में सावन  के गीत गाते  हुए झूले  झूलना ।फूलो का खिलखिला कर मस्ती में हँसना । हवाओं का  आवारा  इधर -उधर भटकना । सब कितना खूबसूरत होता है । ऐसे में  क्यों न उसे  भी बुला लिया जाये जो चंद दिनों पहले दिल में एक प्यास जगा  के चला गया था -
गुलशन में बहारे खिलने लगी हैं अब लौट भी आओ  जानम।
देखो कलियाँ  भी अब  हँसने  लगी  हैं ,अब और न तडपाओ जानम ।
ये फूल बुलाते हैं  मुझको, बस पूछते रहते है तुमको  
गर जाता हूँ  मिलने इनसे, बहुत सताते हैं  मुझको 
देखो !फूलो पर तितलियाँ  मडराने लगी हैं,अब लौट भी आओ  जानम।
गुलशन में बहारे खिलने लगी हैं अब लौट भी आओ  जानम।
पल में धूप  पल में छाव, और रंग बदलती शाम है
बारिश  होती है फिर भी, दिल में अजब सी प्यास है 
देखो ! हवाओ में भी खुशबू  घुलने लगी है ,अब लौट भी आओ  जानम।
कब आता है कब जाता है ,ये सावन भी क्या मौसम है 
ओठो पे हँसी दे जाता है , खुशियों का ये सरगम है
देखो! फिजाओ में मस्ती छाने लगी है अब लौट भी आओ  जानम।
देखो कलियाँ  भी अब  हँसने लगी  है अब और न तडपाओ जानम ।


तब मेरे पास चले आना !!!

जब रात अँधेरी हो जाये तब मेरे पास चले  आना।
जब गम के बादल छा जाये तो मेरे पास चले आना ।
मिट जाये ये रूप तुम्हारा साथ छोड़ दे दुनिया सारी
जब मौसम भी बेगाना हो जाये  तो मेरे पास चले आना ।
जब दिल भर जाये रो - रो कर कोई न पोछे तेरे आंसू 
जब हवा भी चुभने लग जाये  तो मेरे पास चले आना । 
 जब यादें तुझको तडपायें ,रात अकेली हो जाये   
जब दिन कटना मुश्किल हो जाये तो मेरे पास चले आना ।
जब चाँद भी हंसने लग जाये, जब प्यार भी तुझको तरसाए 
कही भूल से मेरी याद आ जाये तो मेरे पास चले आना ।

पूर्णिमा की याद आई !!!

आज फलक पर चाँद पूरा निकला तो पूर्णिमा  की याद  आई ।
 आज फिर गाँव  का पीपल चांदनी में  नहाया तो पूर्णिमा  की याद आई।
इंतजार करते  दीपक बुझ से गए थे अंधेरो  में डूबे थे आशियाने 
आज रात  सूने  आँगन को चमकते देखा तो  पूर्णिमा  की याद आई।
 वादियों की खामोशियाँ हवाओ का बिना आवाज किये गुजर जाना
आज परियो की झंकार से  वादियों को झूमते देखा तो पूर्णिमा की याद आई।
 सुबह से चमकता सूरज था और शाम  का सुहाना मौसम 
मगर आधी  रात  होने को आई और  चाँद न निकला तो पूर्णिमा की याद  आई ।