आहट आती रही रात भर !!!

कहने को यूँ तो सर्द बहारें मुझसे रूठी रहीं रात भर |


फिजाओं में भीनी भीनी सी खुशबू छाई रही रात भर |

कमबख्त बारिशों ने आसमां को खुलने ही ना दिया

पागल निगाहें बादलों में चाँद को ढूंढती रही रात भर |

चाहता था कि मै भी अंधेरो में बैठूं जरा कुछ देर

मशालें उनके मकान की मगर जलती रही रात भर |

उसके अहसास तो घर के कोने-कोने में बिखरे पड़े थे

मेरी गोद में उसकी यादें बेखबर सोती रही रात भर |

कहके गयी थी कि मुड़ कर इधर कभी ना देखूंगी

फिर वो कौन थी जिसकी आहट आती रही रात भर | 

डगर !!!

कोई रास्ता ढूंढ लो जहाँ प्यार की कदर हो
इज्जत मिले, कुछ बात बने |
जिस पर तुम चल रहे हो, वहां प्यार बिकता है |
ऐसे रास्ते, ऐसी पगडंडियां, ऐसे नज़ारे
मोह हैं, भ्रम हैं, गुमराही का सबब है |


उम्मीद !!!

उसने खोया है बहुत, पाया कुछ भी नही है |
वो हारा है बहुत, जीता कुछ भी नही है |
बस एक उम्मीद है, विश्वास है 
और एक दीप है जलता हुआ 
इसके सिवा उसके पास, रहा कुछ भी नही है |