चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

आओ कभी यूँ ही, अचानक !!!

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आओ कभी यूँ ही, अचानक न कोई फ़ोन , न कोई मैसेज न कोई बहाना, न कोई कहासुनी,  बस यूँ ही ,कभी अचानक  जैसे टूट पड़ता है कोई सितारा यूँ...

हाँ, मुझे भी तो अब तुमसे डर लगता है !!

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हाँ, मैं अब तुम्हे “हाय-हेल्लो” नहीं करता, तुम्हे फ़ोन भी नहीं करता, तुमसे बात करने की शुरुवात नहीं करता ! हालाँकि मन बहुत करता है कि तुम्...

तुम जो बसी हो मुझमें, सम्पूर्ण !!!

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हाँ, मैं नही समझ पाता तुम्हे तुम्हारे जेहन में उठते ख्यालों को जो शाख से लगे किसी पत्ते की तरह कभी इस ओर तो कभी उस ओर लुढ़क जाते हैं....
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Om Yadav
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