चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

तुम जो बसी हो मुझमें, सम्पूर्ण !!!

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हाँ, मैं नही समझ पाता तुम्हे तुम्हारे जेहन में उठते ख्यालों को जो शाख से लगे किसी पत्ते की तरह कभी इस ओर तो कभी उस ओर लुढ़क जाते हैं....

मैं तो हर शबे-महताब चलूँ !!!

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  पागल-पागल कहते फिरते मैं फिर भी उनकी राह चलूं | हो दश्त-ए गम कितना भी मैं हर रस्ता बे-हिरास चलूं | इस मुकम्मल जहान में महबूब न कोई आ...

एक उदास रात !!!

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11 बजने को हो गये हैं | रात जवां हो गयी है | फलक पर सितारे नाच रहे हैं , चाँद मुस्कुरा रहा है | चांदनी लोगों के दिलों में मुहब्बत के तराने...
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