चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

कितना बदल गए हो तुम !!!

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इक चुपचाप सी शाम में जहाँ हवा ठहर सी गयी थी जहाँ बस 1 गज के फासले में 4 साल का इन्तजार छुपा बैठ था बेंच जिस पर हम बैठे थे, खुश थी हमें ...

तुम आओगी एक दिन !!!

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मुझे यकीन है कि तुम आओगी तुम आओगी एक दिन , मेरी जिंदगी में  ऐसे नही जैसे आज तक आती रही हो, इस बार तुम आओगी सूर...

हाँ, वह अब जीना सीख गयी है |

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उसकी देह तप रही है | उसका माथे पर पसीने की बूंदे ठहरी हुई हैं और कभी ज्यादा बोझ हो जाने से बह भी जाती हैं | सर्दी से उसके गले में खराश ह...
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Om Yadav
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