चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

तुम भी तो अब बड़ी हो गयी होगी न !!!

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आज अपनी अलमारी देख रहा था  ऑफिस की कुछ फाइलें ढूंढ रहा था  कि हवाओं का एक झोंका  अचानक खिड़की से अंदर आया  और फड़फड़ाते हुए खोल गया ...

झटक दो अपना आँचल !!!

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कई दिनों बाद कभी जब बीत जाए शीत ऋतु तुम आओ जरा वसंत से पहले और झटक दो अपना आँचल मेरे ऊपर कुछ इस तरह कि मेरा रोम रोम भर जाए तुम...

मैं तुमसे चिढ़ता था |

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मैंने तुम्हे कभी बताया नहीं लेकिन मैं तुमसे चिढ़ता था | मैं तुमसे चिढ़ता था क्योंकि तुम क्लास में हमेशा प्रथम आते थे और मैं बस जैसे तैसे पास...
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Om Yadav
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