चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

अँधेरे की बाहों में मिलो कभी !!!

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जहाँ हमें कोई जानता न हो उस गुमनाम रास्ते पर मिलो कभी   बीते दिन बीती यादें भूलकर कुछ कदम मेरे साथ चलो कभी | रूबरू होगी एक नयी जिंदगी ...

चुपके चुपके रोई होंगी ???

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आज दिल कुछ उदास सा है  तनहा, अकेला और गुमसुम सा  रात की बाहों में बैठा  ना जाने क्या सोच रहा है | शायद सोच रहा है अपनी बेरंग जिन्...

बरसती,भीगती मचलती जिन्दगी !!!

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जुगनुओं सी लगती है जिन्दगी जब साथ होती हो तुम, घोर अँधेरे में चमकती, दमकती, मुस्कुराती जिन्दगी | एक दर्द का साया उठता है न जाने ...
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