चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

तुम हर पल याद आते हो !!!

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सुबह सुबह ओस की बूंदों में दोपहर धूप की अगड़ाई में शाम फूलों की खुशबू में तुम ही तुम नजर आते हो  कहीं भी जाऊं ,कहीं  भी रहूँ  नीं...

एक ही बूँद से भीगें हम दोनों !!

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एक ही बूँद से भीगें  हम दोनों । एक बेगाने से मौसम में  एक अनजाने से मिलने छम -छम  आवाज करती आई  थी  तुम रिमझिम-रिमझिम बरसात संग लायी...

ये मेरी जिन्दगी है !!!

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ये मेरी जिन्दगी है मै जैसा चाहूंगी / चाहूँगा वैसे जिऊँगी / जिऊंगा | आज कल अक्सर ये शब्द सुनने को मिल ही जाता है | अभी चंद दिन पहले म...
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