चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

जी करता है !!!

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जी करता है तेरे लिए कभी सावन से मांगकर बहार लाऊं ।  तो कभी रात में नाचती परियों का चुरा कर निखार  लाऊं ।  तेरा मासूम चेहरा ,नादान आँखे...

शायरी !!!

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मैं अलबेला अल्हड मस्ताना ही अच्छा हूँ.... मैं दुनिया के आदिल तौर तरीके क्यों सीखूं !! वो जो कभी मिले ,उसे जी भर के तुम जी ले...
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Om Yadav
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