चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

मुझे बहुत रुलाओगे तुम !!!

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आज दूर ही सही ,कभी मेरे पास आओगे तुम बहुत करीब से अक्स अपना मुझे दिखाओगे तुम । सुबह से शाम तक मेरी आँखों में देखोगे तुम देखते -देखते...

मुह़ब्बत दिन पर दिन बढ़ती जाएगी !!!

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तुम्हे अपनी खूबसूरती पर घमंड है , मुझे अपनी मुह़ब्बत पर नाज  है । तुम्हारी खूबसूरती दिन पर दिन ढलती जाएगी , पर मेरी मुह़ब्बत दिन पर ...
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आस में चलते रहो !!!

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बहती लहरों  के संग संग ,तुम भी चलते रहो मिल जायेगा किनारा कोई ,इस आस में चलते रहो । ये रात काली आई है ,घबरा न जाना देख कर सुबह जिन्दगी ...
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Om Yadav
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