चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

तुमसे मेरा कोई रिश्ता नहीं !!!

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वो कहते रहे तुमसे  मेरा कोई रिश्ता नहीं फिर वो कौन सा बंधन था  जब भी उनको देखा मै आँखें अपनी फेर न सका  और वो मुझे नजरअंदाज कर न सके ...

चांदनी को घर से बाहर देता हूँ !!!

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 चांदनी को घर से बाहर  देता हूँ । जब तुझे आते हुए देख लेता हूँ । बहुत लम्बी हो जाती है मेरी वह रात  जब चाँद के साए में तुझे देख लेता ...

कहीं होने न लगे बारिश !!!

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डरता हूँ तुम्हारे आसमां से जमीन पर आने से कही ख़तम न हो जाये अँधेरा मेरे गरीबखाने से। डर लगता है जब खड़ी  होती हो आईने के सामने कहीं  को...
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