चाँद पराया है !

“शब्द” आत्मा लेखन की | “अहसास” ताकत लेखन की | “अनुभव” गहराई लेखन की | जब शब्द, अहसास और अनुभव का समावेश होता है तो बनती है एक कहानी, एक नज़्म, एक कविता या कोई ग़ज़ल | नज़्म, गीत, ग़ज़ल, कहानी जो दिल से होकर रूह तक को भिगो दें | आपको हमको भिगो दें | ऐसी ही अहसासों, भावनाओं से ओत-प्रोत“चाँद पराया है” में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !!!

और कितना जागोगे ?

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किसी की याद में और कितना जागोगे  अब सो भी जाओ  यारों बड़ी रात हुई । सुबह   उठकर  बताना न  भूलना  सपने  में किस-किस से क्या ...

साथ निभाने की कसमें थी !!!

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यार, मेरे सपने न जाने कहाँ खो गए हैं  अगर आप  को कहीं मिले तो मुझे बता देना । उनमे कुछ  अधूरे अफ़साने  थे । कुछ किये  हुए  वादे  थे   ।...

सुबह - सुबह सूरज की धूप में !!!

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सुबह-सुबह सूरज की धूप में रंग  बिरंगे फूलों  से सजे  बागों में  कभी  फूलों  को देखती तो कभी कलियों  को हथेलियों  से सहलाती कभी  ति...
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